रहीम के दोहे Class 7 – सम्पूर्ण व्याख्या, सारांश एवं प्रश्न-उत्तर | GyanVedaa
अगर आप rahim ke dohe class 7 पढ़ना चाहते हैं और परीक्षा में अच्छे नंबर लाना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। GyanVedaa पर हम हर विषय को उसी तरह समझाते हैं जैसे कोई बड़ा भाई या दीदी बैठकर समझाए — बिना रटाए, बिना बोर किए।
NCERT हिंदी वसंत भाग-2 के अध्याय 11 में रहीम के दोहे दिए गए हैं। ये दोहे इतने पुराने हैं कि सैकड़ों साल बाद भी इनकी बात उतनी ही सच लगती है जितनी तब लगती थी। class 7 hindi chapter rahim ke dohe को एक बार अच्छे से समझ लो, तो ये जिंदगीभर याद रहेंगे।
रहीम कौन थे? — कवि परिचय
मैं अक्सर बच्चों से पूछता हूँ — "रहीम मुसलमान थे, फिर कृष्ण भक्ति कैसे?" यही रहीम की सबसे बड़ी खासियत थी।
रहीम का पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था। इनका जन्म सन् 1556 में हुआ। ये मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक थे — यानी दरबार के नौ सबसे खास लोगों में इनकी गिनती होती थी। रहीम एक साथ कवि, योद्धा, राजनेता और दानवीर थे।
उन्होंने हिंदी में दोहे लिखे जो आज भी पाठ्यपुस्तकों में पढ़ाए जाते हैं — यह अपने आप में उनकी महानता का सबूत है। rahim ke dohe in hindi class 7 पढ़ते समय ध्यान रखें कि ये दोहे किसी मदरसे या मंदिर में नहीं, बल्कि जीवन के असली अनुभवों से निकले हैं।
उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं — रहीम दोहावली, बरवै नायिका भेद, मदनाष्टक और श्रृंगार सोरठा।
पाठ का परिचय
class 7 rahim ke dohe में कुल 7 दोहे हैं। हर दोहा एक अलग विषय पर है — कोई रिश्तों की बात करता है, कोई एकाग्रता की, कोई इज्जत की और कोई ईश्वर-भक्ति की। लेकिन सबकी एक बात समान है — ये सब बातें आज भी उतनी ही जरूरी हैं।
GyanVedaa पर हम rahim ke dohe class 7 explanation इस तरह देते हैं कि हर दोहे का मतलब दिल तक पहुँचे, सिर्फ दिमाग तक नहीं।
रहीम के दोहे — मूल पाठ, अर्थ एवं व्याख्या
दोहा 1
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय।।
कठिन शब्दों के अर्थ: चटकाय = झटके से, जोर लगाकर | गाँठ = गठान | परि जाय = पड़ जाती है
व्याख्या:
यह दोहा मेरा सबसे पसंदीदा है और शायद आपका भी हो जाए।
रहीम कह रहे हैं कि प्रेम एक धागे जैसा होता है। धागा नाजुक होता है — उसे अगर जोर से खींचो, तो टूट जाता है। और एक बार टूट जाए तो? जुड़ता तो है, लेकिन वहाँ एक गाँठ पड़ जाती है। उस गाँठ को कोई हटा नहीं सकता।
ठीक यही बात रिश्तों के साथ होती है। एक बार गुस्से में या जल्दबाजी में कोई रिश्ता तोड़ दो — फिर चाहे लाख कोशिश करो, वो पहले जैसा नहीं होता। बीच में एक कड़वाहट, एक दूरी हमेशा बनी रहती है।
भावार्थ: रिश्तों को सँभालकर रखो। रिश्ते धागे की तरह होते हैं — एक बार टूटे तो गाँठ जरूर पड़ती है।
दोहा 2
रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय। सुनि इठलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय।।
कठिन शब्दों के अर्थ: निज = अपना | बिथा = पीड़ा, दुःख | गोय = छिपाकर | इठलैहैं = खुश होंगे, मजाक उड़ाएंगे | बाँटि = बाँटना
व्याख्या:
यह दोहा पढ़ते ही मन में एक कसक होती है — क्योंकि यह बात हम सब जानते हैं, लेकिन मानते नहीं।
रहीम कह रहे हैं — अपना दुःख मन में ही रखो। किसी को मत बताओ। क्यों? क्योंकि दुनिया में सच्चे हमदर्द बहुत कम हैं। जब तुम अपना दर्द बताओगे, तो कुछ लोग सहानुभूति का नाटक करेंगे और मन ही मन खुश होंगे। कोई तुम्हारा दर्द सच में नहीं बाँटेगा।
यह रहीम की कोई कड़वी बात नहीं है — यह उनका जीवन-अनुभव है। राजदरबार में उन्होंने बहुत कुछ देखा था।
भावार्थ: अपनी तकलीफ हर किसी के सामने मत रखो — सच्चे हमदर्द बहुत कम होते हैं।
दोहा 3
एकै साधे सब सधे, सब साधे सब जाय। रहिमन मूलहि सींचिबो, फूलै फलै अघाय।।
कठिन शब्दों के अर्थ: एकै = एक | साधे = ध्यान लगाने से | सधे = प्राप्त हो जाते हैं | मूलहि = जड़ को | सींचिबो = सींचना | अघाय = भरपूर, खूब
व्याख्या:
आज के ज़माने में जब हर कोई "मल्टीटास्किंग" की बात करता है, रहीम का यह दोहा और भी प्रासंगिक हो जाता है।
रहीम कह रहे हैं — एक काम को पूरे मन से करो, सब मिल जाएगा। अगर एक साथ दस काम पकड़ लो, तो सब बिगड़ जाएंगे। उन्होंने पेड़ का उदाहरण दिया — पेड़ की जड़ सींचो, तो फूल और फल अपने आप आते हैं। हर पत्ती को अलग से पानी नहीं देना पड़ता।
यानी — मूल उद्देश्य पर ध्यान लगाओ, बाकी सब अपने आप होगा।
भावार्थ: एकाग्रता ही सफलता की चाबी है। एक लक्ष्य, पूरी मेहनत।
दोहा 4
चित्रकूट में रमि रहे, रहिमन अवध-नरेस। जा पर बिपदा परत है, सो आवत यह देस।।
कठिन शब्दों के अर्थ: रमि रहे = रमे हुए हैं, निवास करते हैं | अवध-नरेस = अयोध्या के राजा (श्री राम) | बिपदा = मुसीबत, विपत्ति | परत है = पड़ती है | सो = वह
व्याख्या:
रहीम कह रहे हैं — चित्रकूट में भगवान राम का वास है। जिस पर भी मुसीबत आती है, वह यहाँ आता है और उसे सहारा मिलता है।
यहाँ एक गहरी बात छुपी है। रहीम खुद भी जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव देखे थे। उन्होंने यह दोहा सिर्फ भक्ति में नहीं लिखा — यह उनकी अपनी जिंदगी की सीख भी है कि विपत्ति में ईश्वर की शरण सबसे बड़ा सहारा है।
भावार्थ: मुसीबत में ईश्वर की शरण लो — वहाँ हर दुखी को सहारा मिलता है।
दोहा 5
दीन सबन को लखत है, दीनहि लखे न कोय। जो रहीम दीनहि लखे, दीनबंधु सम होय।।
कठिन शब्दों के अर्थ: दीन = गरीब, दुखी | लखत है = देखता है | दीनहि = दीन को | दीनबंधु = गरीबों के मित्र (ईश्वर)
व्याख्या:
इस दोहे में रहीम ने एक बहुत दर्दनाक सच्चाई कही है।
गरीब इंसान सबकी परवाह करता है — वह अपने आस-पास सबको देखता है। लेकिन उसे देखने वाला, उसकी परवाह करने वाला कोई नहीं होता। समाज उसे नजरअंदाज करता है।
रहीम कहते हैं — जो इंसान ऐसे दीन-दुखी को देखे, उनकी मदद करे, वह ईश्वर के बराबर है। यह बात रहीम ने सिर्फ कही नहीं — उन्होंने जीकर भी दिखाई। रहीम अपने दान के लिए पूरे हिंदुस्तान में मशहूर थे।
भावार्थ: जो दूसरों के दुःख को समझे और मदद करे — वही सच्चा इंसान है।
दोहा 6
नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत। ते रहीम पशु से अधिक, रीझेहु बिन पैसे देत।।
कठिन शब्दों के अर्थ: नाद = संगीत की आवाज | रीझि = मुग्ध होकर | मृग = हिरण | नर = मनुष्य | हेत = कारण से | रीझेहु बिन = बिना किसी लालच के
व्याख्या:
रहीम ने यहाँ तीन की तुलना की है — हिरण, मनुष्य और महान व्यक्ति।
हिरण संगीत सुनकर इतना मुग्ध हो जाता है कि शिकारी के बाण का भी होश नहीं रहता — यानी अपना तन दे देता है। मनुष्य धन के लालच में सब कुछ दे देता है। लेकिन जो व्यक्ति बिना किसी लालच के, बिना किसी स्वार्थ के किसी पर मुग्ध होकर सब कुछ दे दे — वह इन दोनों से भी महान है।
भावार्थ: निःस्वार्थ प्रेम और निःस्वार्थ दान — यही सबसे बड़ी बात है।
दोहा 7
रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे, मोती मानुस चून।।
कठिन शब्दों के अर्थ: पानी = तीन अर्थ — मोती की चमक, मनुष्य की इज्जत, चूने की नमी | सून = सूना, बेकार | ऊबरे = उबर सकते हैं | चून = चूना
व्याख्या:
यह rahim ke dohe class 7 का सबसे प्रसिद्ध और परीक्षा में सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला दोहा है।
रहीम ने एक शब्द "पानी" से तीन अलग-अलग बात कही है — यही इस दोहे की असली खूबसूरती है।
पहली बात — मोती की। मोती की कीमत उसकी चमक से होती है। अगर चमक चली जाए, तो मोती एक पत्थर के टुकड़े जैसा है।
दूसरी बात — मनुष्य की। मनुष्य की असली पहचान उसकी इज्जत और आत्मसम्मान से है। जिस इंसान की इज्जत चली जाए, उसका जीना बेमानी हो जाता है।
तीसरी बात — चूने की। चूना तभी काम का है जब उसमें नमी हो। सूखा चूना बेकार है।
तीनों में एक बात कॉमन है — "पानी" (चमक/इज्जत/नमी) बनाए रखो।
भावार्थ: इज्जत और आत्मसम्मान को हमेशा बचाकर रखो — यही तुम्हारी असली पूँजी है।
rahim ke dohe class 7 summary — पाठ सार
rahim ke dohe class 7 summary को सरल शब्दों में समझें तो —
इस पाठ में रहीम ने सात दोहों के जरिए सात जरूरी बातें कही हैं। रिश्तों को सँभालकर रखो, अपना दुःख सबको मत बताओ, एक काम पर पूरा ध्यान लगाओ, विपत्ति में ईश्वर की शरण लो, दीन-दुखियों की मदद करो, निःस्वार्थ भाव से दो और सबसे जरूरी — अपनी इज्जत बचाकर रखो।
यह rahim ke dohe class 7 summary सिर्फ एग्जाम के लिए नहीं — जिंदगी के लिए भी याद रखने लायक है।
rahim ke dohe class 7 question answer — विस्तृत प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1 — पाठ में दिए गए दोहों का केंद्रीय भाव क्या है?
उत्तर: class 7 rahim ke dohe में रहीम ने जीवन के व्यावहारिक सत्यों को बड़े सरल ढंग से कहा है। इन दोहों में प्रेम, मित्रता, एकाग्रता, भक्ति, दान, मनुष्य स्वभाव और आत्मसम्मान जैसे विषय हैं। हर दोहा एक अलग जीवन-पाठ है। रहीम ने इन्हें अपने जीवन-अनुभव से लिखा था — इसीलिए इनमें असली जिंदगी की खुशबू है।
प्रश्न 2 — "रहिमन धागा प्रेम का" दोहे में क्या संदेश दिया गया है?
उत्तर: इस दोहे में रहीम ने प्रेम को एक नाजुक धागे से जोड़ा है। संदेश यह है कि रिश्तों को कभी जल्दबाजी, गुस्से या लापरवाही में नहीं तोड़ना चाहिए। एक बार रिश्ता टूट जाए तो भले ही जुड़ जाए, लेकिन उसमें एक गाँठ हमेशा के लिए रह जाती है — यानी एक कड़वाहट बनी रहती है जो कभी पूरी तरह नहीं जाती।
प्रश्न 3 — "रहिमन पानी राखिए" दोहे में 'पानी' के तीन अर्थ क्या हैं?
उत्तर: यह rahim ke dohe class 7 का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है। इस दोहे में 'पानी' शब्द तीन अलग अर्थों में आया है —
पहला — मोती के संदर्भ में 'पानी' का अर्थ है चमक। बिना चमक के मोती का कोई मूल्य नहीं।
दूसरा — मनुष्य के संदर्भ में 'पानी' का अर्थ है आत्मसम्मान और इज्जत। बिना इज्जत के मनुष्य का कोई मोल नहीं।
तीसरा — चूने के संदर्भ में 'पानी' का अर्थ है नमी। बिना नमी के चूना किसी काम का नहीं।
प्रश्न 4 — "एकै साधे सब सधे" दोहे से क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: इस दोहे से यह शिक्षा मिलती है कि एक समय में एक ही काम पर पूरा ध्यान लगाना चाहिए। रहीम ने पेड़ की जड़ का उदाहरण दिया है — जड़ सींचो तो फूल-फल अपने आप आते हैं, हर पत्ती को अलग से पानी नहीं देना पड़ता। यानी मुख्य उद्देश्य पर ध्यान लगाओ, बाकी सब अपने आप होगा। जो एक साथ बहुत सारे काम करता है, वह किसी में भी सफल नहीं होता।
प्रश्न 5 — रहीम ने "मन की बिथा" को छुपाने की सलाह क्यों दी?
उत्तर: रहीम ने राजदरबार में रहकर बहुत कुछ देखा था। उनका अनुभव था कि दुनिया में सच्चे हमदर्द बहुत कम होते हैं। जब हम अपना दुःख किसी को बताते हैं, तो ज्यादातर लोग उसे बाँटते नहीं — बल्कि मन ही मन खुश होते हैं और मजाक उड़ाते हैं। इसीलिए रहीम ने कहा कि अपनी पीड़ा मन में ही रखो।
प्रश्न 6 — "दीन सबन को लखत है" दोहे का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर: इस दोहे का मुख्य भाव यह है कि समाज में गरीब और दुखी लोग हमेशा दूसरों का ख्याल रखते हैं, लेकिन उनका ख्याल रखने वाला कोई नहीं होता। रहीम कहते हैं कि जो व्यक्ति ऐसे दीन-दुखियों को देखे, उनकी मदद करे — वह ईश्वर के समान पूजनीय है। रहीम खुद भी अपने दानवीर स्वभाव के लिए जाने जाते थे।
rahim ke dohe class 7 question answer short — लघु प्रश्न-उत्तर
rahim ke dohe class 7 question answer short वाले सवाल परीक्षा में 1-2 नंबर के होते हैं — इन्हें जरूर याद करें।
प्रश्न 1 — रहीम का पूरा नाम क्या था? उत्तर — अब्दुर्रहीम खानखाना।
प्रश्न 2 — रहीम किसके दरबार के नवरत्न थे? उत्तर — मुगल सम्राट अकबर के।
प्रश्न 3 — "धागा प्रेम का" किस चीज का प्रतीक है? उत्तर — नाजुक रिश्तों का, जो एक बार टूटने पर पहले जैसे नहीं होते।
प्रश्न 4 — रहीम ने किसे सींचने की बात कही है? उत्तर — पेड़ की जड़ को।
प्रश्न 5 — 'पानी' शब्द का मनुष्य के संदर्भ में क्या अर्थ है? उत्तर — आत्मसम्मान और इज्जत।
प्रश्न 6 — चित्रकूट में किनका वास बताया गया है? उत्तर — भगवान राम (अवध-नरेस) का।
प्रश्न 7 — रहीम ने दीन-दुखियों की मदद करने वाले को किसके समान कहा? उत्तर — दीनबंधु यानी ईश्वर के समान।
प्रश्न 8 — "एकै साधे सब सधे" का सरल अर्थ क्या है? उत्तर — एक काम पर ध्यान लगाओ, सब कुछ मिल जाएगा।
प्रश्न 9 — रहीम का जन्म कब हुआ था? उत्तर — सन् 1556 में।
प्रश्न 10 — मोती के संदर्भ में 'पानी' का क्या अर्थ है? उत्तर — चमक। बिना चमक के मोती बेकार होता है।
काव्य-सौंदर्य — भाषा और अलंकार
rahim ke dohe class 7 explanation पूरी तरह तभी होती है जब काव्य-सौंदर्य भी समझें।
रहीम ने ब्रज भाषा का प्रयोग किया है जो उस समय की साहित्यिक भाषा थी। भाषा सरल है, बोझिल नहीं। दोहा छंद में लिखे गए हैं जिसमें 24 मात्राएँ होती हैं।
अलंकारों की बात करें तो "धागा प्रेम का" में उपमा अलंकार है, "पानी राखिए" में श्लेष अलंकार है क्योंकि एक ही शब्द के तीन अर्थ हैं, और "मूलहि सींचिबो" में दृष्टांत अलंकार है।
रहीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे बड़ी-से-बड़ी बात को दो पंक्तियों में कह देते थे — और वह बात सीधे दिल पर लगती है।
कठिन शब्दार्थ — एक नज़र में
चटकाय — झटके से | बिथा — पीड़ा | गोय — छिपाकर | इठलैहैं — मजाक उड़ाएंगे | एकै — एक | सींचिबो — सींचना | अघाय — भरपूर | बिपदा — मुसीबत | दीन — गरीब, दुखी | लखत — देखता है | नाद — संगीत की आवाज | मृग — हिरण | सून — बेकार | चून — चूना | ऊबरे — उबर सकते हैं | रीझि — मुग्ध होकर
परीक्षा की तैयारी के लिए GyanVedaa के जरूरी टिप्स
class 7 hindi rahim ke dohe की परीक्षा में हर साल कुछ सवाल जरूर आते हैं — इन्हें तैयार रखें।
सबसे पहले "पानी" वाले दोहे के तीनों अर्थ पक्के से याद कर लें। यह हर साल पूछा जाता है। दूसरा, रहीम का परिचय — नाम, जन्म वर्ष, अकबर के नवरत्न — यह भी जरूर आता है। तीसरा, भावार्थ हमेशा अपने शब्दों में लिखें — रटा-रटाया जवाब परीक्षक को पसंद नहीं आता। चौथा, श्लेष अलंकार का उदाहरण इसी पाठ से दिया जा सकता है — "पानी" शब्द। पाँचवाँ, short Q&A की तैयारी जरूर करें क्योंकि 1-2 नंबर के सवाल ही कभी-कभी पास-फेल तय करते हैं।
निष्कर्ष
rahim ke dohe class 7 सिर्फ एक पाठ नहीं है — यह जिंदगी की एक पाठशाला है। रहीम ने जो बातें सैकड़ों साल पहले कही थीं, वे आज भी उतनी ही सच हैं। रिश्तों को सँभालो, एकाग्र रहो, इज्जत बचाकर रखो, और दूसरों की मदद करो — इन चार बातों में पूरे सात दोहों का सार है।
GyanVedaa पर हमने rahim ke dohe class 7 summary, rahim ke dohe class 7 explanation, rahim ke dohe class 7 question answer और rahim ke dohe class 7 question answer short — सब कुछ एक ही जगह दिया है। हमारी कोशिश हमेशा यही रहती है कि आपको किसी और जगह जाना न पड़े।
अगर class 7 hindi rahim ke dohe से जुड़ा कोई सवाल रह गया हो, तो नीचे comment में जरूर पूछें। GyanVedaa पर हम हर सवाल का जवाब देते हैं।
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